मुस्कुरा कर जीना सीखें
07/06/2013 20:22
अपूर्णता को स्वीकार करें
खुशी के प्रति उनका चुम्बकीय लगाव हमें यह अनुभव कराता है कि हमेशा खुश रहने वाले परफैक्ट आत्माएं होती हैं या फिर कम से कम पूर्णता के नजदीक होते हैं। हालांकि वे परफैक्शनिस्ट नहीं होते। उन्हें पता होता है कि ओ.के. दिखना बढिय़ा है और घर पर रहने की बजाय बाहर जाना सही है क्योंकि वे दोष रहित नहीं दिखना चाहते। वे हर रात पार्टी में न होने पर भी ठीक महसूस करते हैं। उन्हें पता होता है कि हमेशा कुछ अच्छी चीजें होंगी जिन्हें अगले व्यक्ति तक पहुंचाना होगा और कुछ चीजें ऐसी हो सकती हैं जिन्हें पूरा किया जा सकता है परन्तु परफैक्ट ढंग से नहीं।
अपेक्षा न रखें
जब आप दूसरे लोगों द्वारा आपकी अपनी खुशी के लिए क्रियाओं तथा प्रतिक्रियाओं पर विश्वास नहीं करते तो यकीनन गेंद आपके पाले में है। कई बार जो लोग हमारे सबसे अधिक नजदीक होते हैं वही हमें नीचा दिखाते हैं। लोग जैसे भी हैं उनकी उसी रूप में प्रशंसा करें और उन्हें बदलने का प्रयास मत करें। जब आप ऐसा करते हैं तो आपको समझ आएगा कि खुशी ही वह चीज नहीं है जो लोग आपको उपलब्ध करवा सकते हैं। यह एक ऐसी चीज है जिसे आप अपने अंदर से खोज सकते हैं।
वर्तमान ही सच है
यदि आपके ऊपर अतीत का अधिक बोझ है या फिर आप भविष्य में अधिक झांक रहे हैं तो इससे बाहर आएं। खुशी की कुंजी इस बात में है कि वर्तमान में जिया जाए। आप वर्तमान में पूरे किए जाने वाले किसी काम पर ध्यान केन्द्रित करने के योग्य नहीं होंगे यदि आप अपने भविष्य के बारे में लगातार दिवास्वप्न देखते रहें। हम अक्सर अपनी सोच को अपने कार्यों से जोड़ते हैं। जब आप कर कुछ और रहे हों और सोच किसी विशेष मुद्दे पर रहे हों तो आपको अपराधबोध हो सकता है। इस बात का कोई महत्व नहीं कि चीजें कितनी तनावपूर्ण हो सकती हैं, बस वर्तमान में जीना सीखें। इसके साथ ही यदि आप लगातार आगे आने वाली चीजों के बारे में चिंता करते हुए अपना समय बिताते हैं तो आप कभी भी वह काम पूरा नहीं कर पाएंगे जिसे अभी पूरा किया जाना चाहिए।
गैर महत्वपूर्ण बात को कहें ‘न’
हम में से अधिकांश उस वक्त बहुत भयानक अनुभव करते हैं जब हम किसी निमंत्रण या अपने लिए दूसरों द्वारा किए जाने वाले किसी काम को न कहते हैं। ऐसा करते हुए आप दूसरे व्यक्ति को यह प्रभाव देते हैं कि आपका समय और स्पेस अधिक महत्वपूर्ण हैं। साथ ही आप इस बात को सुनिश्चित बनाते हैं कि आप जितना मैनेज कर सकते हैं उससे अधिक कभी नहीं लेते। अपने जीवन की प्राथमिकताएं तय करें और उसके अनुसार ही किए जाने वाले कामों की लिस्ट बनाएं। सर्वाधिक महत्वपूर्ण किए जाने वाले काम आपकी लिस्ट पर जरूर हों।
अपने अंदर झांकें
किसी अजनबी या रिश्तेदार द्वारा की गई उन घटिया टिप्पणियों को जाने न दें जो आपके मूड को नष्ट करती हों। घटिया लोग अपनी असुरक्षा तथा अपूर्णता के अनुसार ही कार्य करते हैं। तो क्यों उनकी नकारात्मकता आपके ऊपर असर डाले? खुद को अपने अंदर से ही महत्वपूर्ण महसूस करें तो गुस्सा दिलाने वाले वे लोग कभी भी आपको नीचा नहीं दिखा पाएंगे।
सिल्ली साइड देखें
आप कभी भी विचित्र ढंग से खुश लोगों को ऐसा नहीं देखेंगे कि वे गलत स्टेशन पर जाने या फिल्म की टिकटें खो देने से गुस्सा होते हैं। वे अभी भी आनंद उठाने का कोई न कोई तरीका ढूंढ सकते हैं क्योंकि उन्हें जरूरत होती है और पता होता है कि कैसे क्या करना है। छोटी-छोटी बातों पर अपसैट हो जाने से कुछ भी सुधरता नहीं है। जब कोई व्यक्ति गलत बातों पर हंस सकता हो या हर स्थिति के हास्यात्मक पक्ष को देख सकता हो तो इससे हर किसी को हल्का महसूस होने में सहायता मिलती है।
फैंक दें कूड़ा-कर्कट
रात को सोने से पहले दिन भर की बेकार बातों को अपने दिमाग से साफ करने के लिए 15 मिनट का समय खर्च करें। अगली सुबह उठने पर आपको इस बात की हैरानी होगी कि आपका घर कितना उल्लासपूर्ण और साफ हो गया है। कूड़ा-कर्कट एक छोटी-सी वस्तु लगती है परन्तु आश्चर्यजनक रूप से इसका हमारी खुशी पर अत्यधिक प्रभाव पड़ता है। आपके अनुभव करने से पहले ही यह नकारात्मकता को जमा करता है। ऐसा नहीं है कि कुछ लोग हम से अधिक बेहतर चीजें पा सकते हैं। बात सिर्फ इतनी है कि वे घरेलू चीजों, कपड़ों और इससे भी महत्वपूर्ण उन लोगों के बोझ को उतार फैंकते हैं जो उनकी जिंदगी को कुछ नहीं देते ।
हर चीज के प्रति संतुष्ट रहें
संतुष्टि आनंद का एकत्रित होना है न कि अत्यधिक खुशी का विस्फोट। हर उस क्षण की प्रशंसा करें जिसमें खुशी तथा हास्य हो। तब भी जब यह बहुत छोटा या गैर महत्वपूर्ण हो। जिंदगी के उन बड़े-बड़े पलों (विवाह समारोहों और विदेश यात्राओं) का इंतजार क्यों किया जाए जबकि आप जिंदगी के दिन-प्रतिदिन के छोटे-छोटे इवैंस्ट में भी खुशी का अनुभव कर सकते हैं।
