भूख से मरते हैं रोज 20हजार बच्चे
12/06/2013 22:46
विश्व में प्रति वर्ष 1.3 अरब टन से यादा खाद्य सामग्री बर्बाद हो जाती है जबकि हर सात में से एक व्यक्ति भूखे पेट सोने को मजबूर है तथा रोज 20 हजार से भी अधिक बच्चे भूख और कुपोषण से दम तोड़ देते हैं। संयुक्त राष्ट्र ने धनाढय वर्ष खासकर विकसित देशों की विलासितापूर्ण जीवन शैली के कारण इतनी बड़ी मात्रा मे खाने की बर्बादी और इससे पर्यावरण को हो रहे नुकसान के मद्देनजर इस वर्ष पर्यावरण दिवस का मुख्य विषय रखा है। सोचो खाओ और बचाओ। संयुक्त राष्ट्र खाद्य एवं कृषि संगठन का अनुमान है कि विश्व मे कुल उत्पादित खाद्य प्रदार्थ का एक तिहाई हिस्सा पैदावार, संग्रहण, परिवहन और उपभोग के स्तर पर नष्ट हो जाता है। खाने की सबसे यादा बर्बादी अमेरिका मे होती है जहां प्रति व्यक्ति हर वर्ष 95 से 115 किलोग्राम खाना नष्ट कर देता है जबकि यूरोपीय देश 60 से 110 किलोग्राम और विकासशील देश 6 से 11 किलोग्राम खाने की बर्बादी करते है। भारत मे विवाह तथा अन्य समारोहो मे परोसे गये भोजन का पांचवा हिस्सा कूडे मे फेक दिया जाता है। बच्चो के कुपोषण के मामले के भारत का दुनिया मे दूसरा स्थान है। विशेषज्ञो का अनुमान है कि कुशल श्रमशक्ति और आधारभूत सुविधाओ के अभाव मे देश मे कुल उत्पादित अन का 40 प्रतिशत नष्ट हो जाता है। श्री स्टेइन का कहना है कि पर्यावरण पर इतना बोझ बढ़ाने के बाद यदि एक अरब टन से भी यादा खाद्य सामग्री नष्ट हो जाय तो इसका मतलब है कि सब कुछ व्यर्थ चला गया। यूएनईपी ने लोगो को सलाह दी है कि खाद्य प्रदार्थ का चुनाव करते समय इस बात का ध्यान रखा जाय कि इससे पर्यावरण पर कम से कम बोझ पडे।
मसलन स्थानीय स्तर पर उत्पादित और आर्गेनिक खाने के इस्तेमाल से परिवहन और रासायनिक खाद का बोझ कम होगा। संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने इस मौके पर अपने संदेश में कहा है कि विकासशील देश ढांचागत सुविधाओं में विकास करके. विकसित देश एक्सपायरी डेट के नाम पर ठीक ठाक खाने को कूडे में फेकने से रोकने के लिए लेबलिंग प्रणाली दुरुस्त करके तथा उपभोक्ता फालतू सामान की बजाय केवल अपने जरुरत की चीजे खरीदकर और बचे भोजन का दोबारा इस्तेमाल करके खाने की बर्बादी रोक सकते हैं।
