अंग्रेजी: हिचक तोड़ने में होती है अहम भूमिका

11/06/2013 23:19
आज के समय में अंग्रेजी बोलना फैशन के साथ-साथ करियर की दृष्टि से भी काफी अहम हो गया है। साक्षात्कार से लेकर हर प्रतियोगी परीक्षा तक यह एक अहम भूमिका निभाता है। इंजीनियरिंग, मेडिकल जैसी पढ़ाई के लिए अच्छी किताबें भी अंग्रेजी माध्यम में ही उपलब्ध हैं। उच्च शिक्षा के लिए भी अंग्रेजी जरूरी है, इसलिए जब हिंदी पट्टी, खास कर छोटे शहरों और गांवों के युवा बाहर निकलते हैं तो उन्हें अलग से इंग्लिश स्पोकन क्लासेज की सहायता लेनी पड़ती है।
 
कोचिंग के फायदे
कई बार ग्रामर जानते हुए भी लोग धाराप्रवाह अंग्रेजी नहीं बोल पाते। इसकी वजह होती है उनके मन में बसी हिचक। कोचिंग क्लास में ऐसे लोगों का एक ग्रुप-सा बन जाता है। टीचर ऐसे छात्रों की गलती सुधार देते हैं तो उनकी हिचक मिट जाती है।
धाराप्रवाह अंग्रेजी बोलने के लिए सबसे जरूरी है अभ्यास। ब्रिलियंट ट्यूटोरियल्स के पंकज श्रीवास्तव कहते हैं, बोलना सबसे जरूरी है। गलत या सही से फर्क नहीं पड़ता। जब आप बोलने लगते हैं तो बोलना आ जाता है। कोचिंग क्लास में अंग्रेजी सीखने के दौरान हिंदी बोलने की सख्त मनाही होती है। मजबूरी में अंग्रेजी में बात करनी पड़ती है। साथ ही टीचर भी ग्रुप डिस्कशन, क्लास वर्क व अन्य एक्टिविटीज द्वारा छात्रों को बोलने के लिए प्रोत्साहित करते हैं। इस तरह के अभ्यास से अंग्रेजी बोलना आ जाता है।
कैसे सिखाते हैं 
ज्यादातर स्पोकन इंग्लिश कक्षाओं में शुरुआत अंग्रेजी की आधारभूत जानकारी देने से की जाती है। सबसे पहले ग्रामर की जरूरी जानकारी दी जाती है जैसे नाउन, प्रोनाउन, वर्ब, एडजेक्टिव आदि। फिर सेंटेंस बनाना सिखाने के लिए टेन्स, वॉयस, नेरेशन आदि पढमया जाता है। इसके बाद अभ्यास पर बल दिया जाता है। किसी विषय पर वाद-विवाद या स्पीच देने से लेकर ग्रुप डिस्कशन द्वारा यह कार्य किया जाता है। उच्चारण, एसेंट और हियरिंग प्रॉब्लम दूर करने के लिए सीडी, डीवीडी सुनना, अंग्रेजी मूवी देखना, अंग्रेजी अखबार पढ़ना आदि पर जोर दिया जाता है। कई कोचिंग क्लासेज अपनी ओर से नोट्स और संबंधित सीडी भी उपलब्ध करवाते हैं।
कोर्स 
स्पोकन इंग्लिश के लिए कई तरह के कोर्स हैं, पर इनमें मुख्यत: दो तरह के कोर्स प्रमुख हैं- फंडामेंटल कोर्स और एडवांस कोर्स।
जिनकी अंग्रेजी बहुत खराब है यानी बेसिक ग्रामर तक नहीं जानते, उनके लिए फंडामेंटल कोर्स तथा जिनका आधार मजबूत है, यानी बेसिक जानकारी है, उनके लिए एडवांस कोर्स। हाउसवाइफ के लिए अलग तरह का कोर्स भी कुछ इंस्टीट्यूट करवाते हैं।
बिजनेस और मार्केटिंग के काम से जुड़े लोगों के लिए इंग्लिश का भी कोर्स भी करवाया जाता है। कुछ इंस्टीटय़ूट राइटिंग इंग्लिश के लिए अलग व स्पोकन के लिए अलग कोर्स करवाते हैं। कुछ इंस्टीटय़ूट लेखकों-अनुवादकों के लिए अलग-अलग कोर्स भी करवाते हैं।
नामांकन और अवधि
ज्यादातर कोचिंग क्लासेज में पहले एक एडमिशन टैस्ट लेते हैं, यह जानने के लिए कि संबंधित व्यक्ति का स्तर क्या है, कितनी जानकारी है। फिर परिणाम के अनुसार कोर्स तय किया जाता है। ज्यादातर कोर्स चार या छह महीने के होते हैं। एडवांस कोर्स एक साल तक के भी हो सकते हैं।